सादुलशहर निवासी सुनील गोयल को आखिर नौ साल बाद मिला न्याय, कोर्ट ने मानी पुलिस जांच में थी कमी

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पौने दो लाख नशीली गोलियां बरामदगी के मामले के दो आरोपी बरी
तत्कालीन एसपी और सीआई कोर्ट में तलब

श्रीगंगानगर-सादुलशहर निवासी सुनील गोयल को आखिर नौ साल बाद न्याय मिला…एनडीपीएस प्रकरण की विशेष न्यायालय ने पौने दाे लाख नशीली गोलियां पकड़े जाने के 9 साल से ज्यादा पुराने मामले में दोनों आरोपियों को प्रकरण में दो आरोपियों श्याम सुंदर निवासी मनफूलसिंह वाला और सुनील गोयल निवासी सादुलशहर को बरी कर दिया… ख़ास बात यहाँ है की कोर्ट ने अपने फैंसले में कहा है की न्यायालय ने फैसले में टिप्पणी की है कि तत्कालीन एसपी उमेश दत्ता और एसएचओ सलावत खां ने जांच में गंभीर अनियमितता बरती, इससे करीब दो लाख नशीली गोलियां बरामदगी का बड़ा प्रकरण असफल हो गया है। तत्कालीन एसपी उमेश दत्ता और लालगढ़ थाने के पूर्व एसएचओ सलावत खां को 20 दिनों में कोर्ट में पेश होकर स्पष्टीकरण देने के लिए तलब किया है। कोर्ट ने फैंसले की एक प्रति पुलिस महानिदेशक को भी भेजने के निर्देश दिए हैं। पुलिस द्वारा सुनील गोयल की फर्म गोयल मेडिकल एजेंसी पर पकड़ी गयी दवाओं के मामले में भी कोर्ट ने राहत देते हुए कहा है की फर्म के पास दवाओं के लिए लाइसेंस भी था और दवाओं के बिल भी..अब फर्म मालिक द्वारा इस मामले में अपील की जाएगी

क्या था मामला

5 अगस्त 2009 को लालगढ़ थाने के सीआई सलावत खां ने बुधरवाली रेलवे लाइन के पास कार्रवाई करते हुए मनफूलसिंहवाला के निवासी श्याम सुंदर को छह शीशी और 3400 से ज्यादा नशीली गोलियां सहित पकड़ा और एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की तो पूछताछ में श्याम सुंदर ने सादुलशहर के वार्ड नंबर 5 निवासी सुनील गोयल से यह सामान लाना बताया। पुलिस ने आगे कारवाही करते हुए सुनील गोयल को गिरफ्तार किया और सुनील गोयल के घर से 1.80 लाख नशीली गोलियां व 119 शीशी सिरप बरामद की। इसके बाद श्याम सुंदर व सुनील गोयल के खिलाफ कोर्ट में एनडीपीएस एक्ट के तहत चालान पेश किया था। कोर्ट की टिप्पणी के अनुसार अगर तत्कालीन एसपी उमेश दत्ता व एसएचओ सलावत खां में से कोई एक भी न्यायालय में उपस्थित नहीं होता या फिर उनका स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

ये रही पुलिस की खामियां

मामले में जब्ती अधिकारी एसएचओ लालगढ़ सलावत खां थे और मामले की जांच भी सलावत खां ने की। एसपी उमेश दत्ता ने भी जांच अन्य अधिकारी को नहीं सौंपी। फैसले में कोर्ट ने भी सवाल उठाया कि जब्ती अधिकारी ने स्वयं ही मामले की जांच शुरू कर दी। एसपी उमेश दत्ता ने किसी अन्य अधिकारी को जांच क्यों नहीं सौंपी। जब्ती व जांच अधिकारी एक ही अधिकारी नहीं हो सकता है। आरोपी सुनील गोयल से नशीली दवाओं की बरामदगी से पूर्व एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 के तहत नोटिस नहीं दिया गया। सुनील की गिरफ्तारी से पूर्व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 100 व 165 के प्रावधानों की पालना नहीं की गई। सादुलशहर में की गई बरामदगी की कार्रवाई का जिक्र सादुलशहर थाने के रोजनामचे में नहीं करवाया गया।

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